भारत की संस्कृति को समेटे गुड्डे, गुड़ियों का अनोखा संग्रहालय शंकर डॉल म्यूजियम

दुनिया में चहूं ओर विकास की बयार कुछ इस तरह बही कि पुरानी मनोरंजन की विधाओं को भूलकर मनुष्य तकनीक एवं आधुनिकता के चंगुल में फंसकर यह भूल गया कि कभी गुड्डे गुड़िया भी संस्कृति और कला के परिचायक एवं उसके प्रचार के माध्यम हुआ करते थे। भारत समेत दुनिया भर में गुड्डे गुड़िया के खेल से रोमांच का अवसर ढूंढ़ा जाता था। भारत में मौजूद एक ऐसे संग्रहालय के बारे में जानते हैं, जिसे शंकर के गुड़िया संग्रहालय के नाम से दुनियाभर में ख्याति प्राप्त है।

गुड़ियों के अनोखे संग्रहालय की स्थापना

प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिक कार्टूनिस्ट के० शंकर पिल्लई ने दुनिया के इस अद्भुत संस्कृति के जीवन को सचेत रखने की ओर कदम बढ़ाते हुए सन् 1965 में इंटरनेशनल डॉल म्यूजियम की स्थापना की। जिसे शंकर के गुड़िया संग्रहालय के नाम से भी जाना जाता है।

भारत की राजधानी दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग के नेहरू हाउस में इस संग्रहालय की स्थापना की गई। जहां 85 देशों की 6000 से अधिक गुड़िया प्रदर्शित हैं।  देशभर में पहने जाने वाली पोशाकों को पहने हुए 500 से अधिक गुड़िया प्रदर्शित की गई हैं।

दुनिया के इन हिस्सों को शामिल कर बनाई गई है प्रदर्शनी
भारत समेत अफ्रीका, यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड एवं अन्य यूरोपीय देशों को शामिल करते हुए इस संग्रहालय में पोशाकों का प्रतिनिधित्व करती हुई गुड़ियों को सजाया गया है। ‌

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कर कमलों द्वारा इस संग्रहालय का उद्घाटन किया गया। लेकिन संग्रहालय के निर्माण की एक रोचक कहानी उन दिनों की बताई गई है, जब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू हुआ करते थे। दिल्ली में गुड़ियों की एक प्रदर्शनी आयोजित की गई। जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरु की बेटी इंदिरा गांधी के समक्ष शंकर पिल्लई ने अपने पास मौजूद लगभग 500 से अधिक गुड़ियों के क्षतिग्रस्त होने की चिंता व्यक्त की। 
 
इंदिरा गांधी ने गुड़िया के लिए संग्रहालय बनाने का सुझाव देते हुए, एक स्थाई संग्रहालय के निर्माण की बात कही। आखिरकार जफर मार्ग में निर्माणाधीन चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट के भवन में ही गुड़ियों के संग्रहालय को पर्याप्त जगह दी गई। बताया जाता है कि अलग-अलग पोशाकों को दर्शाती हुई बनाई गई 1000 गुड़ियों के साथ संग्रहालय की शुरुआत की गई।

विदेशी आगंतुकों की सूची में शामिल है शंकर का गुड़िया संग्रहालय

जब भी कोई विदेशी मेहमान खासकर संस्कृति से जो है विदेशी प्रतिनिधि मंडलों का आगमन भारत में होता है तो उनके यात्रा क्रम में इस संग्रहालय को शामिल किया गया है। क्योंकि यह कला का अनूठा केंद्र भारत ही नहीं अपितु कई देशों की संस्कृतियों को बयां करता है।