Mandsaur में दामाद और Bisrakh में बेटे के रूप में पूजे जाते हैं लंकापति रावण

भारत देश में आपको कई ऐसे अनोखे गांव मिल जाएंगे, जिनकी रहस्यमयी कहानियां सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। भारत अपनी अनोखी परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के लिए विदेशों में भी फेमस है। यहां पर आपको कदम-कदम पर इतिहास के अलग-अलग रंग देखने को मिल जाएंगे। वहीं दशहरे के मौके पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद जैसे दानवों के पुतले जलाए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसे गांव भी हैं, जहां पर रावण दहन नहीं बल्कि उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इन अनोखे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं।

बैजनाथ, कांगड़ा

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बैजनाथ में रावण ने घोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था। यहीं पर रावण ने महादेव को अपने 10 सिर अर्पित किए थे। वहीं दशानन की अटूट भक्ति की वजह से यहां के स्थानीय लोग रावण को महादेव का परम भक्त मानते हैं। यहां पर दशहरे के मौके पर रावण दहन की बजाय लोग दीपक जलाकर पूजा करते हैं।

बिसरख गांव

उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव का नाम लंकापति रावण के पिता महर्षि विश्रवा के नाम पर पड़ा था। इसलिए इस गांव के लोग दशानन को अपना बेटा मानते हैं। यही वजह है कि यहां पर कभी रामलीला का आयोजन नहीं होता है और न ही दशहरा के मौके पर रावण दहन किया जाता है। इस गांव में दशहरा के दिन शोक का माहौल रहता है। वहीं रावण की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा भी की जाती है।

मंदसौर

मध्य प्रदेश के मंदसौर के स्थानीय लोग दशानन रावण को अपने क्षेत्र का दामाद मानते हैं। इस जगह का प्राचीन नाम 'दशपुर' था। जिसको रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका माना जाता है। मंदसौर के खानपुरा में दशहरे के दिन रावण दहन नहीं किया जाता है। वहीं महिलाएं जब रावण की प्रतिमा के सामने से गुजरती है, तो दामाद होने के नाते उसके सम्मान में घूंघट निकालती हैं।

बस्तर और दक्षिण भारत

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में गोंड और बैगा आदिवासी समुदाय के लोग ताड़का को अपनी रक्षक और कुलदेवी के रूप में मानते हैं। वहीं कर्नाटक के कोलार और मांड्या जिले में भी ऐसे गांव हैं, जहां पर ताड़का की शक्तियों और रावण के ज्ञान का आदर किया जाता है। यहां के निवासी दीपक जलाकर उनकी पूजा करते हैं।

कैसे पहुंचे इन अनोखे गांवों तक

बता दें कि इस सभी जगहों पर आप ट्रेन या फ्लाइट के जरिए पहुंच सकती हैं। नजदीकी रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट पर पहुंचते ही आप कई लोकल टैक्सी या कैब आसानी से मिल जाएंगी। जिससे आप इन गांवों तक पहुंच सकती हैं।