India's UNESCO Heritage: अंडमान के Barren Island और छत्तीसगढ़ के Sirpur को मिलेगी UNESCO पहचान

भारत में कई ऐसी जगहें मौजूद हैं, जोकि अपने प्राचीन इतिहास, अनोखी बनावट और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं। कहीं चट्टानों के बीच लाखों साल पुरानी गुफाएं मौजूद हैं, तो कहीं पर धरती के भीतर से लावा निकलता है। कुछ जगहें ऐतिहासिक अवशेषों और प्राचीन मंदिरों के जरिए अपने बीते दौर की कहानियां कहती हैं। वहीं अब भारत की 3 ऐसी ही जगहों को UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव में शामिल किया जाएगा। तो आइए जानते हैं इन जगहों के बारे में...

ये जगह बनेंगी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट

अगर आपको भी नेचर, इतिहास और अनोखी जगहों को एक्सप्लोर करना पसंद है। तो आपको भारत की कुछ खास जगहों को जरूर जानना चाहिए। अंडमान-निकोबार के ज्वालामुखी और एक्टिव ज्वालामुखी द्वीपों से लेकर छत्तीसगढ़ के प्राचीन मंदिरों तक की अपनी खास और अलग पहचान है। वहीं इन जगहों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में कदम उठाया गया है। तो आइए जानते हैं इन जगहों के बारे में और यहां कर पहुंचने के रास्ते के बारे में।

चूना पत्थर की गुफाएं और बारातांग मड ज्वालामुखी

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित बारातांग अपने अनोखे जियोलॉजिकल स्ट्रक्चर के लिए जाना जाता है। यहां पर चूना पत्थर से बनी गुफाएं और मड ज्वालामुखी देखने को मिलता है। अधिकतर ज्वालामुखियों से लावा निकलता है। लेकिन मड वोल्केनो से जमी के अंदर मौजूद पानी, कीचड़ और गैसें बाहर आती हैं। यहां की गुफाएं लंबे समय तक पानी के चूना पत्थर को घोलने से बनी हैं। वैज्ञानिकों के लिए इसकी बनावट बेहद अहम है। क्योंकि इसके अध्ययन से धरती की पुराने जलवायु बदलावों और बनावट को समझने में मदद करती है।

अगर आप भी यहां पर जाना चाहती हैं, तो आप सड़क मार्ग से पोर्ट ब्लेयर के जरिए बारातांग पहुंच सकती हैं। यात्रा के दौरान जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से गुजरना पड़ता है। इसलिए यहां जाने के लिए स्थानीय प्रशासन के नियमों और निर्धारित परिवहन व्यवस्था का पालन करना बेहद जरूरी है।

अंडमान सबडक्शन ज्वालामुखी

इस प्राकृतिक धरोहर में नारकोंडम और बैरन आइलैंड शामिल है। बैरन आइलैंड भारत का एकमात्र एक्टिव ज्वालामुखी है। वहीं दूसरी तरफ नारकोंडम एक हरा-भरा ज्वालामुखी द्वीप है। नारकोंडम हॉर्नबिल नामक दुर्लभ पक्षी का आवास भी है। जोकि सिर्फ इसी द्वीप पर पाया जाता है। वैज्ञानिकों के लिए यह द्वीप ज्वालामुखी गतिविधियों और अलग-अलग इकोसिस्टम को समझने के लिहाज से बेहद अहम है।

यहां पर जाने के लिए पोर्ट ब्लेयर अंडमान के लिए प्रमुख प्रवेश केंद्र है। बैरन और नारकोंडम द्वीपों तक आम पर्यटकों की पहुंच काफी सीमित है। खासकर नारकोंडम जाने से पहले यहां से संबंधित अधिकारियों से अनुमति और मौजूदा नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।

छत्तीसगढ़ का सिरपुर सांस्कृतिक और पुरातात्विक क्षेत्र

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महानदी के किनारे स्थित सिरपुर अपने प्राचीन इतिहास और स्थापत्य कला के लिए फेमस है। 5वीं से 12वीं शताब्दी के बीच यह एक बेहद अहम बस्ती थी। यहां बौद्ध विहारों, जैन धर्म और हिंदू मंदिरों से जुड़े अवशेषों के प्रमाण मिलते हैं। यहां पर लक्ष्मण मंदिर ईंटों की बनी संरचना और बेहद खूबसूरत नक्काशीदार प्रवेश द्वार है। पुरातात्विक अवशेष बताते हैं कि यह सिर्फ धार्मिक गतिविधियों का केंद्र नहीं था, बल्कि वहां पर शिल्प, व्यापार और व्यवस्थित बस्ती का भी विकास हुआ था।

यहां पर जाने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट रायपुर है। रायपुर से बस या टैक्सी से आप सिर्फ 2 घंटे में सिरपुर पहुंच सकते हैं।