स्वर्ग से कम सुंदर नहीं उत्तराखंड की यह फूलों की घाटी, जहाँ से हनुमान जी लाए थे संजीवनी बूटी

  • प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क

स्वर्ग से कम सुंदर नहीं उत्तराखंड की यह फूलों की घाटी, जहाँ से हनुमान जी लाए थे संजीवनी बूटी
हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड राज्य में अनेक मशहूर पर्यटक स्थल हैं। उत्तराखंड में स्थित फूलों की घाटी भी यहाँ आने वाले पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। हर साल लाखों पर्यटक यहाँ आते हैं और  फूलों की घाटी की सुंदरता का लुफ्त उठाते हैं। उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित यह खूबसूरत घाटी विश्व धरोहर में भी शामिल है। आइए जानते हैं उत्तराखंड में स्थित इस फूलों की घाटी के बारे में -   

चमोली जिले में स्थित है फूलों की घाटी 
उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित फूलों की घाटी दुनियाभर में अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। यह एक राष्ट्रीय उद्यान जो उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। बर्फ के पहाड़ों से घिरी यह घाटी 87।50 किमी वर्ग क्षेत्र में फैली हुई है। इसे यूनेस्को ने 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया था। फूलों की घाटी में  500 से भी अधिक फूलों की प्रजातियां मौजूद हैं। इतना ही नहीं इस घाटी में उगने वाले फूलों का इस्तेमाल दवाई भी बनाने के लिए भी किया जाता है।  प्रकृति से प्यार करने वालों और बागवानी के शौकीन लोगों के बीच फूलों की घाटी काफी लोकप्रिय है। 

रामायण और महाभारत में भी है वर्णन 
फूलों की घाटी के बारे में कहा जाता है कि रामायण और महाभारत में भी इस जगह का वर्णन किया गया है। माना जाता है कि फूलों की घाटी ही वह स्थान है जहाँ से हनुमान जी भगवान लक्ष्मण की जान बचने के लिए संजीवनी बूटी लाए थे। 

कई सालों तक घाटी में जाने से कतराते थे लोग 
आज भले ही देश-विदेश से लोग फूलों की घाटी घूमने आते हों लेकिन काफी साल पहले तक लोग इस घाटी में जाने से कतराते थे। इसके पीछे यह वजह है कि यहाँ के स्थानीय लोगों का मानना था कि फूलों की घाटी में परियों का निवास है। 

दो ब्रिटिश पर्वतारोहियों ने की थी खोज 
फूलों की घाटी की खोज 1931 में हुई थी। फ्रैंक स्मिथ और होल्डसवर्थ नाम के दो ब्रिटिश पर्वतारोहियों ने पहली बार इस घाटी की थी। इसके बाद से फूलों की घाटी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई थी। स्मिथ ने फूलों की घाटी पर वैली ऑफ फ्लॉवर्स नाम की एक किताब भी लिखी है।