अध्यात्म और पर्वतीय आकर्षण से भरपूर तुंगनाथ मंदिर, जानिए क्यों है खास?

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित तुंगनाथ मंदिर भगवान शिव के पंच केदारों में से एक है। तुंगनाथ मंदिर आस्था अध्यात्म के साथ-साथ बर्फबारी और पर्वतीय आकर्षण से भरपूर है। अध्यात्म और पर्यटन के सम्मिलित रूप से प्रचलित तुंगनाथ विश्वव्यापी है। यहां हर साल ठंड के मौसम में सैलानियों का तांता लगा रहता है। माना जाता है कि रावण के वध के बाद श्री रामचंद्र ने तुंगनाथ के इसी स्थान पर पर्वत में एकांत में कुछ समय व्यतीत किया था। तुंगनाथ में भगवान शिव के हाथ की पूजा की जाती है। समुद्री तल से 3680 मी.ऊंचाई पर मौजूद यह मंदिर आस्था और पहाड़ियों के ऊपर बर्फ से बिछी सफेद चादर से आकर्षण का मुख्य बिंदु बना हुआ है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर नंदी बैल की पत्थर की मूर्ति है, जो पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव के सवारी हैं। इसके अलावा यहाँ अलग-अलग देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर इस मंदिर के आसपास मिलते हैं। तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का स्रोत है, जिनसे अक्षकामिनी नदी बनती है।

तुंगनाथ की स्थापना
पौराणिक कथाओं के अनुसार तुंगनाथ की स्थापना पांडवों द्वारा करवाई गई थी। माना जाता है कि कुरुक्षेत्र में भीषण महायुद्ध संग्राम के बाद पांडवों द्वारा अपने भाइयों का वध करने से भगवान शिव रुष्ट हो गए थे। महाभारत का युद्ध खत्म हो जाने के बाद पांडव व्याकुल हो गए थे उन्हें अपने भाइयों के वध का पश्चाताप हो रहा था यही कारण था कि ऋषि व्यास की सलाह पर पांडव अपने पाप के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तुंगनाथ की पहाड़ियों पर पहुंचे। माना जाता है कि पांडव वंश के तेज धनुषधारी अर्जुन ने तुंगनाथ की स्थापना की।

तुंगनाथ कैसे पहुंचे

तुंगनाथ जाने के लिए सबसे आकर्षक वह सुनहरा महीना मई से नवंबर तक का होता है। जनवरी और फरवरी के महीने में भी सैलानियों की काफी भीड़ लगती है। तुंगनाथ के दर्शन के लिए सर्वप्रथम ऋषिकेश जाएं यहां से दो रास्ते मिलते हैं पहला गोपेश्वर से होते हुए चोपता, दूसरा उखिमीठ से होते हुए चोपता, चोपता से तुंगनाथ के लिए स्थानीय साधन मिल जाता है, चोपता से तुंगनाथ मंदिर तीन किलोमीटर दूर है।

तुंगनाथ का आकर्षण
तुंगनाथ अध्यात्म,आस्था और पहाड़ों के आकर्षण से भरपूर है। लोग यहां आस्था और विश्वास के साथ मत्था टेकने के साथ-साथ यहां के खूबसूरत वादियों का भी आनंद लेते हैं। पर्वतों के वादियों की खूबसूरती के साथ बर्फ के पीछे सफेद चादर तुंगनाथ की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। आस्था के मंदिर और पर्वतों के आकर्षण के साथ यहाँ पे मखमली घास के आकर्षण को देखते ही सैलानियों के पांव थमे के थमे रह जाते हैं। तुंगनाथ के पर्वतों में खेले कुरान्स के फूल की खूबसूरती ऐसा लगती है जैसे मानो पृथ्वी की हरियाली अपने रंग-बिरंगे फूलों के साथ पर्वतों पर बिछी बर्फ की सफेद चादर और आसमान के मिलन को नीचे से झांक रही हो।