आम का स्वाद है बेहद खास, जानिए कौन-कौन से राज्य के आम हैं विश्व प्रसिद्द

फलों का राजा कहा जाने वाला आम अपनी मिठास, खट्टास से लोगों के मन को मोह लेता है। गर्मियों का मौसम आते ही फलों के राजा की तलाश जोरों शोरों से की जाने लगती है। गर्मी के गर्म दिनों में आम अपनी ठंड भरी मिठास को घोल कर लोगों के दिल को सुकून पहुंचाता है। आम का स्वाद कई तरीके से लिया जाता है चाहे खट्टे आमों की खटास, भोजन में आम की चटनी, आचार का जायका या फिर पके हुए आम का रस। स्वाद के साथ-साथ आम सेहत के लिए भी लाभप्रद होता है आम का सेवन करने से पेट से संबंधित कई बीमारियां, एसिडिटी, लू से सुरक्षा, ब्लड सर्कुलेशन आदि बीमारियों से निजात पाने के लिए उपयोगी है। आम का उपयोग फल के साथ-साथ खाने की वस्तुएं जैसे आचार, अमचूर, आम पापड़, खटाई में किया जाता है।

अनेकता में एकता के लिए भारत जाना जाता है,जिस प्रकार भारत में अलग जाति, अलग धर्म, अलग संस्कृति के लोग हैं ठीक उसी प्रकार यहां अलग-अलग राज्यों में अनेक प्रकार के आमों की वरायटी मिलती है।

आम उत्पादन में भारत का नंबर 1 स्थान
आम के उत्पादन में भारत दुनिया का राजा है। दुनिया भर में आम की करीब 1400 किस्में पाई जाती हैं जिनमे से एक हजार किस्में भारत में पैदा होती हैं यही कारण है कि भारत फलों के राजा आम का नंबर वन उत्पादक देश लगातार बना हुआ है। आइए जानते हैं कौन से राज्य किस आम के लिए प्रसिद्ध है।

लंगडा आम, उत्तर प्रदेश
लंगडा आम उत्तर प्रदेश राज्य के मशहूर मीठे रसीले आमों में से एक है। इस आम की किस्म करीब 250 वर्ष प्राचीन बताई जाती है। इस आम का नाम लंगड़ा पड़ने के पीछे बनारस का एक मशहूर किस्सा है। माना जाता है कि बनारस के शिव मंदिर में एक लंगड़ा पुजारी रहता था। यह बात 250 वर्ष पुरानी है। उसी मंदिर में एक साधु आकर ठहरा,उसने मंदिर में आम के दो पौधे लगाएं। वर्षों बाद जब आम के पेड़ों ने फल देना प्रारंभ कर दिया तो लंगड़े पुजारी ने इसे भगवान शिव को अर्पित किया, दरअसल यहां पर ठहरने वाले साधु ने पुजारी को आदेश दिया कि इस आम को किसी को न दिया जाए परंतु काशी के राजा ने आम साधु से ले लिए,आम की मिठास के कारण धीरे-धीरे ये पूरे बनारस में फैल गया और लोगों के बीच यह आम लंगडा आम के नाम से प्रसिद्ध है। अच्छी गुणवत्ता होने के कारण यह आम पश्चिम एशिया बांग्लादेश और ब्रिटेन में भी एक्सपोर्ट किया जाता है।

दशहरी आम, उत्तर प्रदेश
दशहरी आम का पेड़ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लगाया गया था। यह आम स्वाद में मीठा और रसदार होता है,इस आम को पक जाने के बाद भी इसके ऊपर की चमड़ी हरी रहती है। इस आम का उत्पादन सर्वाधिक उत्तरप्रदेश में 20 लाख टन होता है। माना जाता है कि दशहरी आम का पहला पेड़ लखनऊ के पास काकोरी स्टेशन से सटे दशहरी गांव में लगाया गया। यही कारण है कि इस आम को लोग दशहरी आम से जानने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि वो पेड़ आज भी मौजूद है जिस पर पहला दशहरी आम था। इस पेड़ की उम्र करीब 200 वर्ष बताई जाती है साथ ही इसे मदर ऑफ मैन्गो ट्री  कहा जाता है। इसके अलावा भी और ऐसे कई आम है जिनके नाम जिस गांव में आम का पेड़ पर प्रथम बार देखा गया उसी गांव के नाम पर रखा गया है।

अल्फांसो आम, महाराष्ट्र
अल्फांसो आम का सबसे अधिक उत्पादन महाराष्ट्र में होता है। अल्फांसो आम की एक अलग खूबी है यह तौल के साथ-साथ दर्जन में भी बिकता है। इसे आमों का राजा भी कहा जाता है। इस आम का सर्वाधिक एक्सपोर्ट अमेरिका को किया जाता है। अल्फांसो को ब्रिटेन में भी उगाया जाता है। भारत में इसे हापुस आम के नाम से भी जाना जाता है। यह लंगडा आम के बाद सबसे अधिक मीठा होता हैं। कई देशों में इसके दाम और भी ज्यादा हो जाते हैं।

बंगपल्ली आम, आंध्र प्रदेश
यह आम भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में पाया जाता है। इस आम के खाने वाले शौकीनों के लिए आम इतना मीठा और रसीला दार होता है कि इसका छिलका भी खाया जा सकता है। इस आम का परिचय आंध्र प्रदेश के कुनुर जिले में एक शाही परिवार ने कराया था। इस आम को जियोग्राफिकल इंडिकेटर का टैग भी प्राप्त हो चुका है। इस टैग का महत्व बताता है कि किसी विशेष क्षेत्र के उत्पादन में ऐसे गुण होते हैं जो अकेले उस क्षेत्र के लिए विशिष्ट होते हैं। तमिल में इस आम से मैंगो मोर कुझान्बू ना की तमिल स्टाइल में कड़ी भी बनाई जाती है,दही में बेसन मिलाकर उसमें आम के टुकड़े डालकर यह कर ही बनाई जाती है,इसका स्वाद दक्षिण भारत के लोगों को खूब भाता है।

हिमसागर और मालदा आम, पश्चिम बंगाल
हिमसागर भारत के राज्य पश्चिम बंगाल का अपने खुशबू और मिठास के कारण  बहुत ही लोकप्रिय हैं। यह भारत के पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में राजशाही में मिलने वाला आम है। मालदा आम को हर वर्ष अमेरिका यूरोप दुबई स्वीडन नाइजीरिया इंग्लैंड आदि देशों में रहने वाले लोग पटना के दीघा घाट से मंगाते हैं। यह आप मीठा और खुशबू की वजह से दीवानों के दिल में पैठ बना लीया है। मालदा आम के कद्रदानों की महाराष्ट्र यूपी गुजरात पश्चिम बंगाल दिल्ली राजस्थान आदि राज्यों में भरमार है।लोकप्रियता के कारण इस आम का व्यापार करने वाले व्यापारी भी मोटी रकम कमा लेते हैं। आम की खुशबू मिलते ही आमों के शौकीन आम के व्यापारियों की ओर दौड़े चले जाते हैं,जिससे गर्मियों में व्यापारियों के दुकान खूब चलती है।

तोतापुरी आम, कर्नाटक
यह भारत के कर्नाटक राज्य में पाया जाता है। तोतापुरी आम की वैरायटी तोते की चोंच के जैसी होती है इतना ही नहीं इस आम का रंग भी तोते से खूब मेल जोल खाता हैं, और इसी खास कारण  से इस आम को तोता पुरी आम के नाम से जाना जाता है।

केसर आम, गुजरात
केसर आम गुजरात में पाया जाता है। इस आम का छिलके का रंग केसरिया होने के कारण इसे केसर आम के नाम से जाना जाता है। यह आम अपनी मिठास से गुजरात ही नहीं संपूर्ण विश्व के लोगों के मन को भाता है। इस आम की पैदावर गुजरात में सबसे अधिक होती है और यहीं से इसे एक्सपोर्ट किया जाता है। छिलके का रंग केसरिया होने के कारण यह आम देखने में भी बेहद खूबसूरत लगता है।